प्रख्यात हिंदी साहित्यकार कुमार विमल का एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारीके बाद शनिवार २६ नवम्बर २०११ को सुबह १०:४० बजे निधन हो गया. वे 80 वर्ष के थे. उनके पार्थिव शरीर को लोहिया नगर , कंकर बाग़ में उनके आवास पर लाया गया. वे मूलत लखीसराय के पचेना गावं के रहने वाले थे. चार भाइयो में सबसे बड़े डॉक्टर विमल अपनी पत्नी, चार बेटियोंऔर दो बेटों से भरा पूरा परिवार छोड गए. उनकी कई कविताएं अंग्रेजी, बंगाली, तेलुगु, मराठी, उर्दू और कश्मीरी में अनुवाद किया गया. अपने महत्वपूर्ण पुस्तकों के अलावा 'मूल्य और मीमांसा ' और कविताएं 'अंगार' और 'सगरमाथा ' उनकी प्रसिद्ध रचना हैं. श्री विमल पूर्व नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति, बिहार लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष और बिहार इंटरमीडिएट शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष के अलावा वे डी जे कॉलेज मुंगेर, जैन कॉलेज आरा और औरर पटना विश्वविद्यालय के अध्यक्ष भी रहे. वे १९७० में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् के निदेशक बने. उनका जन्म १२ अक्टूबर १९३१ को उनके ननिहाल भागलपुर जिले के कल्चुक में हुआ था.
उन्हें शत शत नमन!
विनम्र श्रद्धांजलि ...नमन
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