"उस हिंदी भाषा के खेत में भावों की सुनहली फसल लहलहा रही हो, वह भाषा भले ही कुछ दिनों यों ही उपेक्षित पड़ी रहे पर उसकी स्वाभिक उर्वरता अप्रभावित रहेगी. वहां फिर हरीतिमा के दिन आयेंगे और पौष मास में फिर 'नवान्न उत्सव' आयोजित होगा.''
--गुरुदेव

"सम्प्रेषण" हिंदी का इतिहास, उसके विविध रूपों, प्रयोगों तथा प्रभाव को समझने एवं उसका क्रमबद्ध अध्ययन करने का मेरा लघु प्रयास मात्र है. साथ ही अभिव्यक्ति का माध्यम भी.
भारतीय संविधान की ८ वीं अनुसूची के भाग 'क' में २२ भाषाएँ और भाग 'ख' में शेष भाषाएँ सम्मिलित किये गए है. १९६१ तथा १९७१ की जनगणना के अनुसार भारत में मत्त्रिभाषाएं की कुल संख्या १६५२ है तथा १८७ भाषाएँ है. स्पष्ट है की भारत एक बहुभाषी देश है.
विश्व की जनसँख्या का १६% भाग इंडो यूरोपियन परिवार की इंग्लिश भाषा तथा चीनी परिवार की मंदारिन भाषा का प्रयोग करती है . दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा हिंदी है. हिंदी को विश्व के लगभग १५% जनसँख्या बोलते है. संविधान की अनुच्छेद ३४३ के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है. अरुणाचल प्रदेश, अंदमान - निकोबार, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, राजस्थान , उत्तरप्रदेश, और उत्तरांचल में भी हिंदी ही राजभाषा है.
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है की हिंदी अब विश्वभाषा के रूप में स्थापित है. अतैव इसकी व्यापकता, प्रसार तथा सामर्थ्य का अनुसन्धान हमारा दायित्व है. संभवत आप भी मुझसे सहमत होंगे.
आशा है की हम भारतीय अपनी जिम्मेवारी समझेंगे तथा राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करेंगे.
जय हिंद .
धन्यवाद.
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