इंदिरा गोस्वामी जो मामोनी गोस्वामी ( जन्म 14 नवम्बर १९४२) के नाम से भी जानी जाती है, एक लोकप्रिय संपादक, कवियत्री , प्रोफेसर, विदुषी और साहित्यकार रही है. उनका निधन 29 नवम्बर २०११ को हुआ. यह हमारे लिए अकल्पनीय क्षति है.
वह साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता (1982), ज्ञानपीठ पुरस्कार (2000) और कई अन्य पुरस्कार की विजेता रही है. समकालीन भारतीय साहित्य के सबसे प्रसिद्ध साहित्यकारों में से वे एक थी. अपने लेखन के माध्यम से उन्होंने सामाजिक परिवर्तन की नीब रखी. वे अलगाववादी असम के यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट और भारत की केंद्रीय सरकार के बीच मध्यस्थ के रूप में सफल भूमिका अदा की.
पाकिस्तान पर उनकी एक अनुदित कविता इस प्रकार से है---
ओह पाकिस्तान, दिव्य भूमि!
हमें अपने दिल दे दो!
और बदले में हमारे दिल ले!
एक बार जब हम एक ही आकाश साझा!
एक ही सूरज के साथ आकाश!
हम युद्ध के मैदान पर में जुड़वां बहनों की तरह ही दर्द साझा
धूल हटाने.
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दोस्तों! तुम रहो खुश,
... अब रह रहे हो जहाँ !
स्मृति कभी मारती नहीं ,
कवियों का कहना है
दूरी केवल इसे करती है शुद्ध ...
हम एक ही पेड़ के नीचे बैठे थे,
एक ही फूल की खुशबू का आनंद लिया
एक समय तक...
किन्तु कई टुकड़े में है अब !
नष्ट पहाड़ और फूल के उद्यान
जहां
हम खेला था!
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हमारी तरफ से उन्हें शत शत नमन.

