आज मुझे पटना जाना था. लेकिन, मेरी तबियत ठीक नहीं लग रही थी. मैने अपनी नई योजना बनी. पटना जाने की तिथि अगले दिन के लिए स्थगित कर दिया. इस विचार अथवा निर्णय के बाद से मुझे राहत महसूस हो रहा है. मुझे लगता है की जीवन में मनोनुकूल निर्णय लेना तथा योजना बनाना हितकारी होता है. संयोगबश, इसी बिच एक प्रेरक प्रसंग पढ़ने को मिला. मै उसे यहाँ कहना चाहता हूँ .
सिकंदर महान विश्वविजेता बनने की इच्छा रखता था. उस हेतु वह कई युद्ध लड़ता हुआ भारत आया. भारत में युद्ध के सञ्चालन के लिए प्रचलन के अनुसार उसे हाथी पर स्वर होने के लिए कहा गया. वह हाथी पर सवार हो गया. तत्पश्चात, उसने पूछा--'' हाथी की लगाम कहाँ है?''
सेनापति ने जवाव दिया--"हाथी को अंकुश से नियंत्रित किया जाता है और यह काम हाथी पर बैठा महावत करता है. हाथी पर लगाम नहीं लगे जाते है." यह सुनकर सिकंदर तुरंत हाथी पर से उतड़ गया और सेनापति से कहा:--"मै ऐसी सवारी पर नहीं बैठ सकता जिसका नियंत्रण मेरे हाथो में न हो." अंतत उसने घोड़े पर सवार हो युद्ध का सञ्चालन किया.
वास्तव में जिसने भी स्वयं पर विश्वास किया है उसे हर सफलता प्राप्त हुआ है.
वास्तव में जिसने भी स्वयं पर विश्वास किया है उसे हर सफलता प्राप्त हुआ है.
ReplyDeleteSahi Baat...